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Free Antivirus Ka Sach Kya hai ? must be read (safe your computer)

The Truth about Free Antivirus
The Truth about Free Antivirus must be read (safe your computer)
Free Antivirus ka Sach Kya Hai डियर रीडर्स , आज तक हमने इंटरनेट जगत में बहुत सारे फ्री एंटीवायरस के बारे में पढ़ा सुना और डाऊनलोड करके यूज भी किये। क्या आप जानते हैं की इन फ्री एंटीवायरसों की सच्चाई क्या है। हर एंटीवायरस पहले ही से यूज किया हुआ होता है ,जो की सिर्फ एक ही बार काम करता है ,उसके बाद वही एंटीवायरस कई कम्प्यूटरों में डालने पर वो सिर्फ फोरी तौर पर काम करता है ,और जल्द ही दम तोड़ जाता है। क्यूँ की एंटीवायरस की कम्पनियां हर एक एंटीवायरस के लिए एक अलग क्रेक की देती हैं ,जो की सिर्फ एक बार और एक ही कंप्यूटर के कार्य करने में सक्षम होती  हैं। 

जब आप बाजार से कोई एंटीवायरस की सीडी खरीदते हैं तो उसमे क्रेक की का एक कार्ड साथ में होता है ,असल कीमत तो उसी की ली जाती है ,उस क्रेक की को यूज करने के बाद लोग उसे शेयर कर देते हैं जो की किसी काम की नही होती। उस क्रेक की को हम जैसे लोग यूज करते हैं लेकिन वो कुछ समय तक काम करती है और कभी कभी बिलकुल काम भी नही करती ,उसके बाद वो क्रेक की खत्म हो जाती है। ऐसे में हमारे कंप्यूटर का एंटीवायरस बिना सीरियल क्रेक की के काम करना बंद कर देता है ,और नतीजा ये निकलता है की वो एंटीवायरस जिसे हमने फुल वर्जन समझकर डाऊनलोड किया था ,रजिस्ट्रेशन माँगना शुरू कर देता है। क्यूँ की उसमे लगी क्रेक की पहले ही से इस्तेमाल शुदा होती है। मेरा अपना तजर्बा तो यही है की मैंने दुनिया भर के फ्री फुल वर्जन एंटीवायरस यूज किये ,आखिर मुझे नए एंटीवायरस की सीडी खरीदकर ही यूज करना पड़ा। और उसका रिजल्ट देखने के बाद दिल संतुष्ट हुआ ,और मै इस नतीजे पर पहुंचा की फ्री फुल वर्जन एंटीवायरस के नाम पर अब हमे धोखा नही खाना चाहिए। 





सच्चाई तो यही है, अब फिर भी इसके बाद कोई ये दलील दे की हमारे कंप्यूटर का एंटीवायरस तो एक साल तक काम करता है ,जिसे हमने डाऊनलोड ही किया था ,तो ये सिर्फ एक वहम है ,आप अपने कंप्यूटर में नए एंटीवायरस को खरीद कर डालें ,आपको फर्क समझ में आ जायेगा। वैसे एंटीवायरस की ओरिजनल सीडी भी इतनी महँगी नही है ,मैंने जोधपुर में अच्छे से अच्छे एंटीवायरस तीन चार सौ तक में मिलते देखे हैं। और यहाँ दुबई में पचास दिरहम में अच्छे से अच्छा एंटीवायरस मिल ही जाता है। ऐसे में फ्री फुल वर्जन एंटीवायरस के नाम पर धोखा खाने और कंप्यूटर को तबाह करने की क्या जरुरत है। 

कई हैकर्स फ्री एंटीवायरस में ऐसी फाइल्स और वायरस को डाल देते हैं ,जो की कंप्यूटर की सभी इन्फोर्मेशन उनको भेजते हैं.यहाँ तक की आप फ्री एंटीवायरस को अपने कंप्यूटर में डालने के बाद जो भी एक्टिविटीज करते हैं ,उन सभी की सुचना इन वायरस के जरिये से हैकर्स तक पहुँच जाती है.चाहे आप जीमेल यूज करें या गूगल एडसेंस ,कुछ भी महफूज़ नही रहता.इसी तरह एंटीवायरस के साथ साथ कई ऐसे सोफ्टवेयर हैं जो की पहले से ही हैक किये जा चुके हैं ,उनमे इस तरह की फाइल्स और वायरस पाए जाते हैं ,जो की हैकर्स को सूचनाएं भेजने का कार्य करते हैं.

एक टेक्निकल कॉलेज के हाल ही में हुए सर्वे में ये बात सामने आई है की इंटरनेट से क्रेक और फुल वर्जन के नाम पर जितने भी सोफ्ट्वेयरस मौजूद हैं ,उनमे से ज्यादातर में इस तरह के वायरस और फाइल्स पाए जाते हैं ,जो की हैकर्स तक आपकी सभी इन्फोर्मेशन को भेजने का कार्य करते हैं.ज्यादातर ऐसे सोफ्ट्वेयरस आपको ब्लोग्स पर मिलेंगे.इसके अलावा हैकर्स ने कई सर्च इंजन्स भी बनाये हुए हैं जो की खुद बा खुद ही आपके कंप्यूटर में इनस्टॉल हो जाते हैं.और आप जब उन्हें यूज करते हुए कुछ भी एक्टिविटीज करते हैं तो वो सर्च इंजन्स हैकर्स तक सभी जानकारियां भेज देते हैं.आपने भी कई बार किसी सोफ्टवेयर को डाऊनलोड करने के बाद देखा होगा की इस तरह के सर्च इंजन्स आपके ब्राउजर में अपने आप ही इंस्टाल हो जाते हैं ,चाहे जितनी कोशिश कर लो वो हटने का नाम ही नही लेते.अगर इस तरह की समस्या आ भी जाये तो फ़ौरन आप अपने कंप्यूटर को फोर्मेट कर दें.

इसलिए अगर आप अपने कंप्यूटर को वाकई वायरस और स्पायवेयर से छुटकारा दिलाना चाहते हैं तो ओरिजनल सीडी खरीद कर उसे यूज करके देखें ,उम्मीद है की इससे आपके कंप्यूटर की सेहत सलामत रहेगी। और वो कुछ साल और अच्छा चलेगा। ये मेरे अपने तजर्बात हैं अगर आप मेरी बात से सहमत हैं तो यूज किये हुए एक्सपायर एंटीवायरस को दुबारा यूज करने के बजाय नया एंटीवायरस खरीद कर ही यूज करें ,वर्ना आप चाहे तो कुछ साल और इस पर अपना तजर्बा करके फिर मेरी राय को अपना सकते हैं। एक नया खरीदा हुआ ओरिजनल एंटीवायरस एक साल तक कंप्यूटर की सही सुरक्षा करता है। अगर कुछ खर्च करके आप अपने कंप्यूटर को लम्बे समय तक सही चला सकते हैं ,तो ये सौदा महंगा नही है। मै आजकल खुद भी ओरिजनल एंटीवायरस ही यूज कर रहा हूँ। और इसके रिजल्ट देखने के बाद इसे ही यूज करना पसंद करता हूँ।
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                                                       ''आमिर अली दुबई ''
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  1. बहुत बढ़िया जानकारी ।धन्यवाद ।

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  2. सुन्दर जानकारी...

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  3. सही कहा आप ने मैं भी काफी मशक्कत झेलने के बाद अब पिरिम्यम एंटी वाइरस पर आ टिका हूँ

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  4. ये हुई न कोई बात, बहुत सारे तकनिकी ब्लोगर्स फ्री/फुल एंटी-वायरस के बारे में भ्रमित करते रहते हैं और हम होते रहते हैं.मैं भी सालों से ओरिजनल एंटी-वायरस उपयोग में ला रहा हूँ. धन्यबाद बहुत सारे यूजर्स के भ्रम से निजात दिलाने के लिये.

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  5. में आप की बात से सहमत नही हूँ आमिर जी
    क्योकि कोई भी एंटीवायरस भी तो एक सॉफ्टवेर है आप कोई दूसरा सॉफ्टवेर ले लीजिये उसमे आप क्रैक डालिए जैसे इन्टरनेट डाउनलोड मेनेजर इसका क्रैक डालिए और वो तो वैसे ही डाउनलोड स्पीड देता है जैसा खरीदा हुआ देता है
    इस प्रॉब्लम के सलूशन के लिए आपके जबाब का इंतजार

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    1. दूसरे सोफ्टवेयर क्रेक में और एंटीवायरस क्रेक की में शायद यही एक फर्क है की एंटीवायरस क्रेक वन टाइम यूज होता है। इसलिए दुबारा नाकारा हो जाता है। दूसरे कई सोफ्टवेयर तो बिना क्रेक के भी कार्य कर जाते हैं ,लेकिन कंप्यूटर को सुरक्षा सही और ओरिजनल एंटीवायरस ही दे सकता है।

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